जयद्रथवधः — The Slaying of Jayadratha
Sunset Vow and Curse-Condition
प्रतिज्ञां पारयिष्यामि काम्बोजानेव मां वह । अद्यैषां कदनं कृत्वा प्रियं यास्यामि पाण्डवम्,सात्यकि बोले--सूत! जैसे इन्द्र दानवोंका वध करते हैं, उसी प्रकार आज मैं इन मथमुंडे काम्बोजोंका ही वध करूँगा और ऐसा करके अपनी प्रतिज्ञा पूर्ण कर लूँगा। अतः तुम उनन््हींकी ओर मुझे ले चलो। इन सबका संहार करके ही आज मैं अपने प्रिय सुहृद् पाण्डुनन्दन अर्जुनके पास चलूँगा
pratijñāṁ pārayiṣyāmi kāmbojān eva māṁ vaha | adyaiṣāṁ kadanaṁ kṛtvā priyaṁ yāsyāmi pāṇḍavam ||
सात्यकि बोला—“मैं अपनी प्रतिज्ञा पूर्ण करूँगा। मुझे सीधे काम्बोजों की ओर ले चलो। आज उनका संहार करके ही मैं अपने प्रिय पाण्डव—अर्जुन—के पास जाऊँगा।”
सूत उवाच