Kṛṣṇa-vīrya-kathana
Dhṛtarāṣṭra’s appraisal of Vāsudeva’s deeds
सत्यं धृतिर्मति: शौर्य बाह्दां चास्त्रमनुत्तमम् सात्वते तानि सर्वाणि त्रैलोक्यमिव केशवे,जैसे भगवान् श्रीकृष्णमें तीनों लोक स्थित हैं, उसी प्रकार सात्वतवंशी सात्यकिमें सत्य, धैर्य, बुद्धि, शौर्य तथा परम उत्तम ब्रह्मास्त्र विद्यमान हैं
satyaṁ dhṛtir matiḥ śauryaṁ bāhūnāṁ cāstram anuttamam | sātvate tāni sarvāṇi trailokyam iva keśave ||
वैशम्पायन बोले— सत्य, धैर्य, बुद्धि, शौर्य और भुजबल का अनुपम अस्त्र—ये सब सात्वतवंशी सात्यकि में वैसे ही विद्यमान थे, जैसे केशव (श्रीकृष्ण) में तीनों लोक स्थित हैं।
वैशम्पायन उवाच