Chapter 89: Bhīma dispatched to protect Ghaṭotkaca amid escalating engagements
रणे भारतसिंहस्य ददृशु: क्षत्रिया गतिम् । अग्नेर्वायुसहायस्य यथा कक्ष॑ दिधक्षत:
जैसे वायु की सहायता से घास-फूस को जलाने को उद्यत अग्नि अत्यन्त प्रज्वलित हो उठती है, वैसे ही रणभूमि में क्षत्रियों ने भरतवंश-सिंह भीष्म की गति और स्वरूप को अत्यन्त तेजस्वी देखा।
संजय उवाच