येनासि बहुशो राज्ञा चोदित: सूतनन्दन । “उत्तम व्रतका पालन करनेवाले वीर! मैं कभी-कभी तुमसे जो कठोर वचन बोल दिया करता था
सूतनन्दन! राजा के द्वारा तुम बार-बार उकसाए जाते थे। उत्तम व्रत का पालन करने वाले वीर! मैं कभी-कभी तुमसे जो कठोर वचन कह देता था, उसका उद्देश्य तुम्हारे उत्साह और तेज का नाश करना नहीं था; कारण यह था कि सूतनन्दन, तुम राजा दुर्योधन के उकसाने से अकारण ही पाण्डवों पर बार-बार आक्षेप किया करते थे।
संजय उवाच