उस समय कौरवोंपर भयंकर मोह छा गया था। कर्ण और दुर्योधन भी बारंबार लंबी साँसें खींच रहे थे ।।
और कौरवों के पितामह भीष्म के इस प्रकार रथ से गिर पड़ने पर सर्वत्र हाहाकार मच गया; कहीं कोई मर्यादा न रही।
संजय उवाच