भीष्मस्य शरशय्या-प्राप्तिः
Bhīṣma’s Fall to the Arrow-Bed
आजपघानोरसि क्ुद्धो भीष्मस्य वधकाडुक्षया । तयोरयुद्धं समभवद् घोररूपं भयावहम्
इसी प्रकार पाण्डव सहदेव भीष्म-वध की आकांक्षा से क्रुद्ध होकर शारद्वतपुत्र कृपाचार्य की छाती में बाणों से प्रहार करने लगा। उन दोनों का युद्ध घोर रूप धारण कर भयावह हो उठा।
संजय उवाच