पाण्डव-वृष्णि-समागमः तथा अश्वमेध-अनुज्ञा | Reunion at the Kuru Court and Authorization of the Aśvamedha
अघोषयंस्तदा चापि पुरुषा राजधूर्गता: । सर्वराष्ट्रविहारोउद्य रत्नाभरणलक्षण:
तब राजकार्य सँभालने वाले पुरुषों ने भी घोषणा करवा दी कि आज समूचे राष्ट्र में उत्सव मनाया जाए, और सब लोग रत्नों के आभूषण तथा उत्तम-उत्तम वस्त्र धारण करके इस महोत्सव में सम्मिलित हों।
वैशम्पायन उवाच