उत्तङ्कोपाख्यानम् — Maṇi-Kuṇḍala Retrieval and Entry into Nāgaloka
Chapter 57
सौदास उवाच यदि मत्तस्तवायत्तो गुर्वर्थ: कृत एव सः । यदि चासिसि प्रतिग्राह्मु: साम्प्रतं तद् वदस्व मे
सौदास ने कहा— ब्रह्मन्! यदि आपकी गुरुदक्षिणा मेरे अधीन है तो उसे प्राप्त ही समझिए। और यदि आप मुझे दान देने योग्य मानते हैं, तो अभी बताइए— मैं आपको क्या दूँ?
सौदास उवाच