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Shloka 10

उत्तङ्कोपाख्यानम् — Maṇi-Kuṇḍala Retrieval and Entry into Nāgaloka

Chapter 57

सत्यं ते प्रतिजानामि नात्र मिथ्या कथंचन । अनृतं नोक्तपूर्व मे स्वैरेष्वपि कुतो5न्यूथा

“मैं आपसे सत्य प्रतिज्ञा करता हूँ; इसमें किसी प्रकार का मिथ्या नहीं है। मैंने पहले कभी परिहास में भी असत्य नहीं कहा, फिर अन्य अवसरों पर कैसे कह सकता हूँ?”

उत्तड्ुक उवाच