Uttanka’s Inquiry and Vāsudeva’s Adhyātma Exposition
Guṇa–Ritual–Immanence Teaching
महर्षे विदितं भूय: सर्वमेतत् तवानघ । तेडत्यक्रामन् मतिं महां भीष्मस्य विदुरस्यथ च
महर्षे! यह सब कुछ आपको भली-भाँति विदित है, अनघ। प्रारब्ध के विधान को कोई बुद्धि या बल से मिटा नहीं सकता। कौरवों ने मेरी, भीष्मजी की और विदुरजी की महान सम्मति को भी ठुकरा दिया।
वैशम्पायन उवाच