Adhyāya 51: Kṛṣṇa’s Leave-Taking and Departure for Dvārakā (द्वारकागमनानुमति)
इन्द्रियाणि मनो युड्धक्ते सदश्चानिव सारथि: । इन्द्रियाणि मनो बुद्धि: क्षेत्रज्ञे युज्यते सदा
जैसे कुशल सारथि अच्छे घोड़ों को अपने वश में रखता है, वैसे ही मन समस्त इन्द्रियों पर शासन करता है। इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि—ये सदा क्षेत्रज्ञ के साथ संयुक्त रहते हैं।
वायुदेव उवाच