Brahmā’s Instruction on Brahmacarya, Vānaprastha, and the Aliṅga Path
Ethics of Non-attachment
अनागतं च न ध्यायेन्नातीतमनुचिन्तयेत् । वर्तमानमुपेक्षेत कालाकाड्क्षी समाहित:
संन्यासी को चाहिए कि वह न भविष्य का ध्यान करे, न अतीत का अनुताप/चिन्तन करे; और वर्तमान को भी उपेक्षा में रखे। केवल काल की प्रतीक्षा करता हुआ, समाहित चित्त रहे।
वायुदेव उवाच