Kṛṣṇa–Arjuna Saṃvāda in Indraprastha: Consolation, Legitimation, and Leave for Dvārakā (आश्वमेधिकपर्व, अध्याय १५)
उक्तो बहुविध॑ राजा तत्र तत्र युधिष्ठिर: । सह भीष्मेण यद् युक्तमस्माभि: शोककारिते
शोक से व्याकुल राजा युधिष्ठिर को मनुष्य का दुःख दूर करने हेतु जो-जो उपदेश उचित था, वह भीष्म सहित हम लोगों ने अनेक प्रकार से, अनेक अवसरों पर दिया; और उन्हें भाँति-भाँति से समझाया।
वायुदेव उवाच