अध्याय ९ — धृतराष्ट्रस्य युधिष्ठिरं प्रति राजनित्युपदेशः
Dhṛtarāṣṭra’s Counsel on Royal Policy to Yudhiṣṭhira
कुरुसंवरणादीनां भरतस्य च धीमत: । वृत्तं समनुयात्येष धर्मात्मा भूरिदक्षिण:
यज्ञों में बड़ी-बड़ी दक्षिणाएँ देनेवाले ये धर्मात्मा (युधिष्ठिर) प्राचीन काल के राजर्षि कुरु, संवरण आदि तथा बुद्धिमान् राजा भरत के आचरण का अनुसरण करते हैं।
वैशम्पायन उवाच