Vyāsa’s Boon-Offer and Dhṛtarāṣṭra’s Remorse in the Forest Assembly (आश्रमवासिक पर्व, अध्याय ३६)
तमभ्यर्च्य महाबाहु: कुरुराजो युधिष्ठिर: । आसीन परिविश्वुस्तं प्रोवाच वदतां वर:
महाबाहु कुरुराज युधिष्ठिर ने नारदजी का पूजन करके उन्हें आसन पर बैठाया। वे बैठकर कुछ विश्राम कर चुके, तब वक्ताओं में श्रेष्ठ युधिष्ठिर ने उनसे इस प्रकार कहा।
वैशम्पायन उवाच