Vyāsa’s Boon-Offer and Dhṛtarāṣṭra’s Remorse in the Forest Assembly (आश्रमवासिक पर्व, अध्याय ३६)
अग्नींस्तु याजकास्तत्र जुह॒वुर्विधिवत् प्रभो । दृश्यतो<दृश्यतश्वचैव वने तस्मिन् नृपस्य वै
हे प्रभो, वहाँ यज्ञ कराने वाले ब्राह्मण विधिपूर्वक अग्नियों में हवन करते रहते थे। और उस वन में राजा कभी दिखाई देते, कभी अदृश्य हो जाते थे।
नारद उवाच