Āśramamaṇḍala-darśana and Ṛṣi-samāgama
Observation of the Hermitage Precinct and the Assembly of Sages
ततः सो5वभृथे राजा मुदितो जनमेजय: । पितरं स्नापयामास स्वयं सस््नौ च पार्थिव:
तदनन्तर अवभृथ-स्नान के समय प्रसन्न राजा जनमेजय ने पहले अपने पिता को स्नान कराया, फिर स्वयं भी स्नान किया। उसी स्थान पर राजा परीक्षित् भी अन्तर्धान हो गये।
जनमेजय उवाच