अध्याय ३३ — धृतराष्ट्रस्य कुशलप्रश्नाः तथा विदुरस्य योगसमाधिः
Chapter 33: Dhṛtarāṣṭra’s Welfare-Inquiries and Vidura’s Yogic Absorption
है ० बक। ] अति: चतुस्त्रिंशो 5 ध्याय: मरे हुए पुरुषोंका अपने पूर्व शरीरसे ही यहाँ पुन: दर्शन देना सम्भव है
Sautiḥ uvāca—etac chrutvā nṛpo vidvān hṛṣṭo ’bhūj Janamejayaḥ | pitāmahānāṁ sarveṣāṁ gamanāgamanam tadā ||
सौति बोले—अपने समस्त पितामहों के इस प्रकार परलोक से आने और जाने का वृत्तान्त सुनकर विद्वान् राजा जनमेजय अत्यन्त प्रसन्न हुए।
वैशम्पायन उवाच