Adhyāya 32: Tāpasānāṃ Darśanaṃ — Ascetics Seek to Identify the Pāṇḍavas
आज शम्मुस्ते महात्मान: सवाहा: सपदानुगा: । कितने ही राक्षसों और पिशाचोंके लोकोंमें चले गये और कितने ही उत्तरकुरुमें जा पहुँचे। इस प्रकार सबको विचित्र-विचित्र गतियोंकी प्राप्ति हुई थी और वे महामना वहींसे देवताओंके साथ अपने-अपने वाहनों और अनुचरोंसहित आये थे
आज वे महामना अपने-अपने वाहनों और अनुचरोंसहित चले गये—कितने ही राक्षसों और पिशाचों के लोकों में, और कितने ही उत्तरकुरु में जा पहुँचे। इस प्रकार सबको विचित्र-विचित्र गतियाँ प्राप्त हुईं; और वे वहीं से देवताओं के साथ अपने-अपने वाहनों और अनुचरोंसहित आये थे।
वैशम्पायन उवाच