Bhāgīrathī-tīra-śauca, Kurukṣetra-gamana, and Śatayūpa-āśrama-dīkṣā (गङ्गातीरशौच–कुरुक्षेत्रगमन–शतयूपाश्रमदीक्षा)
क्षत्रिया वैश्यवर्गा वा शूद्रा वापि कुटुम्बिन: । भारत! क्या तुम अन्न और जलके द्वारा अतिथियोंका सत्कार करते हो? क्या तुम्हारे राज्यमें ब्राह्मण
हे भारत! क्या क्षत्रिय, वैश्यवर्ग, शूद्र अथवा कुटुम्बीजन अन्न और जल के द्वारा अतिथियों का सत्कार करते हैं? और क्या तुम्हारे राज्य में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र तथा कुटुम्बीजन न्याय-मार्ग का आश्रय लेकर अपने-अपने कर्तव्य के पालन में तत्पर रहते हैं?
धृतराष्ट उवाच