Dhṛtarāṣṭra’s Śrāddha Request and Bhīma’s Objection (Āśramavāsika-parva, Adhyāya 17)
तस्यास्तांतु स्थिति ज्ञात्वा व्यवसायं कुरुस्त्रिय: । निवत्तांश्व कुरुश्रेष्ठान् दृष्टवा प्ररुरुदुस्तदा
कुन्ती की यह दशा और वन में रहने का दृढ़ निश्चय जानकर, कुरुश्रेष्ठ पाण्डवों को निराश लौटते देखकर, कुरुकुल की सारी स्त्रियाँ उस समय फूट-फूटकर रो पड़ीं।
वैशम्पायन उवाच