Puṣkara-Śapatha Itihāsa (Agastya–Indra Dispute at the Tīrthas) | पुष्कर-शपथ-आख्यानम्
अरुन्धत्युवाच धर्मार्थ संचयो यो वै द्रव्याणां पक्षसम्मत: । तप:संचय एवेह विशिष्टो द्रव्यसंचयात्
अरुन्धती बोलीं—कुछ लोगों की यह सम्मति है कि धर्म के लिए धन का संचय करना चाहिए; पर मेरी दृष्टि में धन-संचय से बढ़कर तपस्या का संचय ही श्रेष्ठ है।
विश्वामित्र उवाच