Pitṛ-śrāddha-haviḥ-phala-nirdeśa
Offerings for Ancestors and Their Stated Results
उवाच ज्वलनं विप्र तदा गर्भबलोद्धता । ते न शक्तास्मि भगवंस्तेजसो5स्य विधारणे
विप्रवर! तब गर्भ की शक्ति से अभिभूत होकर जाह्नवी देवी काँपती हुई अग्नि से बोलीं—“भगवन्! मैं आपके इस तेज को धारण करने में समर्थ नहीं हूँ।”
भीष्म उवाच