Dāna-Śreṣṭhatā: Abhaya, Anugraha, and the Ethics of Honoring the Worthy (दानश्रेष्ठता: अभय-अनुग्रह-विप्रपूजा)
स्वर्गोद्देशस्त्वया राजन् सशरीरेण पार्थिव । मुहूर्तमनु भूतो 5सौ सभार्येण नृपोत्तम
राजन्, पार्थिव! तुमने सशरीर, पत्नी सहित, कुछ मुहूर्त तक स्वर्ग का अनुभव किया है, हे नृपोत्तम।
च्यवन उवाच