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Shloka 10

Cyavana Explains His Tests; Kuśika Seeks Brāhmaṇya for His Line (च्यवन–कुशिक संवादः)

च्यवन: समनुप्राप्य कुशिकं वाक्यमब्रवीत्‌ | वस्तुमिच्छा समुत्पन्ना त्वया सह ममानघ

च्यवन मुनि कुशिक के पास पहुँचकर बोले—“निष्पाप नरेश! मेरे मन में तुम्हारे साथ कुछ समय रहने की इच्छा उत्पन्न हुई है।”

भीष्म उवाच