Pratyakṣa–Āgama–Ācāra: Doubt, Proof, and the Practice of Dharma (प्रत्यक्ष–आगम–आचारविचारः)
राजानो राजतपूुत्राश्न निर्धना ये महाधना: । कर्मणा केन भगवनू् प्राप्रुवन्ति महाफलम्,भगवन्! जो राजा या राजकुमार हैं अथवा जो निर्धन या महाधनी हैं, वे किस कर्मके प्रभावसे महान् फलके भागी होते हैं?
rājāno rājaputrāś ca nirdhanā ye mahādhanāḥ | karmaṇā kena bhagavan prāpnuvanti mahāphalam, bhagavan ||
भगवन्! राजा और राजकुमार, तथा निर्धन और महाधनी—ये सब किस कर्म के प्रभाव से महान् फल के भागी होते हैं?
श्रीमहेश्वर उवाच