Śiva-nāmānukīrtana-prastāvaḥ
Prologue to the praise of Śiva and the Upamanyu testimony
हरचरणनिरतमतिना भवितव्यमनार्जवं युगं प्राप्य । संसारभयं न भवति हरभक्तिरसायनं पीत्वा
कुटिल कलियुग को पाकर भी मनुष्य को अपना चित्त भगवान् हर (शंकर) के चरणारविन्दों के चिन्तन में लगाना चाहिए। शिव-भक्ति रूपी रसायन का पान कर लेने पर संसार-भय नहीं रहता।
वासुदेव उवाच