Śiva-nāmānukīrtana-prastāvaḥ
Prologue to the praise of Śiva and the Upamanyu testimony
अलमन्याभिस्तेषां कथाभिरप्यन्यधर्मयुक्ताभि: । येषां न क्षणमपि रुचितो हरचरणस्मरणविच्छेद:
जिन्हें क्षणभर के लिए भी भगवान् हर (शिव) के चरणारविन्दों के स्मरण से वियोग अच्छा नहीं लगता, उनके लिए अन्य-धर्मों से युक्त दूसरी सब कथाएँ व्यर्थ हैं।
वासुदेव उवाच