Bhaṅgāśvanopākhyāna — On comparative affection in strī–puruṣa union (भङ्गाश्वनोपाख्यानम्)
युष्माकं पैतृकं राज्यं भुज्यते तापसात्मजै: । इन्द्रेण भेदितास्ते तु युद्धेउन्योन्यमपातयन्
“तुम लोगों का जो पैतृक राज्य है, उसे तपस्वी के पुत्र आकर भोग रहे हैं।” इन्द्र द्वारा फूट डलवाए जाने पर वे आपस में लड़ पड़े और युद्ध में एक-दूसरे को मार गिराया।
भीष्म उवाच