उपदेशदोषप्रसङ्गः (Upadeśa-doṣa-prasaṅgaḥ) — The Risk of Misapplied Counsel
इतस्त्वमधमामन्यां मा योनि प्राप्स्यसे द्विज । गृह्मातां द्रविणं विप्र पूतात्मा भव सत्तम
हे द्विजश्रेष्ठ! कहीं ऐसा न हो कि इसके बाद आप किसी नीच योनि को प्राप्त हों। अतः हे विप्रवर, जितना उचित हो उतना धन ग्रहण कीजिए और अपने अन्तःकरण को पवित्र करने का प्रयत्न कीजिए।
पुरोहित उवाच