उपदेशदोषप्रसङ्गः (Upadeśa-doṣa-prasaṅgaḥ) — The Risk of Misapplied Counsel
पुरोहित उवाच एकं वै वरमिच्छामि यदि तुष्टो5सि पार्थिव । प्रतिजानीहि तावत् त्वं सत्यं यद् वद नानृतम्
पुरोहित ने कहा—पृथ्वीनाथ! यदि आप प्रसन्न हों तो मैं एक ही वर चाहता हूँ। पहले आप यह प्रतिज्ञा कीजिए कि आप सत्य ही कहेंगे, असत्य नहीं।
पुरोहित उवाच