उपदेशदोषप्रसङ्गः (Upadeśa-doṣa-prasaṅgaḥ) — The Risk of Misapplied Counsel
राजोवाच वराणां ते शतं दद्यां कि बतैकं द्विजोत्तम । स्नेहाच्च बहुमानाच्च नास्त्यदेयं हि मे तव
राजा ने कहा—द्विजश्रेष्ठ! मैं आपको सौ वर दे सकता हूँ, एक की तो बात ही क्या। आपके प्रति मेरे स्नेह और विशेष आदर के कारण आपके लिए मेरे पास कुछ भी अदेय नहीं है।
भीष्म उवाच