Ādi-parva Adhyāya 3 — Janamejaya’s Rite, Dhaumya’s Parīkṣā, and Uttanka’s Kuṇḍala Quest (सर्पसत्रप्रस्तावना–गुरुपरीक्षा–उत्तङ्कोपाख्यान)
एतस्मिन्नन्तरे कश्चिदृषिर्धोम्यो नामायोदस्तस्य शिष्यास्त्रयो बभूवुरुपमन्युरारुणिवेंदश्वेति,(गुरुकी आज्ञाका किस प्रकार पालन करना चाहिये, इस विषयमें आगेका प्रसंग कहा जाता है--) इन्हीं दिनों आयोदधौम्य नामसे प्रसिद्ध एक महर्षि थे। उनके तीन शिष्य हुए-- उपमन्यु, आरुणि पांचाल तथा वेद
Etasminn antare kaścid ṛṣir Dhaumyo nāmāyodaḥ; tasya śiṣyās trayo babhūvuḥ—Upamanyur, Āruṇir Vedaśva iti.
इसी बीच आयोदधौम्य नाम से प्रसिद्ध एक महर्षि थे। उनके तीन शिष्य थे—उपमन्यु, आरुणि और वेदश्व। (यहाँ गुरु की आज्ञा का पालन कैसे करना चाहिए, इस विषय का प्रसंग आरम्भ होता है।)
राम उवाच