Bhīṣma’s Counsel on Reconciliation and Partition (भीष्मोपदेशः—संधि-राज्यविभागविचारः)
व्यास उवाच अस्मिन् धर्मे विप्रलब्धे लोकवेदविरोधके । यस्य यस्य मतं यद् यच्छोतुमिच्छामि तस्य तत्,व्यासजीने कहा--अत्यन्त गहन होनेके कारण शास्त्रीय आवरणके द्वारा ढके हुए अतएव इस लोक-वेद-विरुद्ध धर्मके सम्बन्धमें तुममेंसे जिसका-जिसका जो-जो मत हो, उसे मैं सुनना चाहता हूँ
व्यासजी बोले—“यह विषय अत्यन्त गूढ़ है और लोक तथा वेद—दोनों के प्रतिकूल प्रतीत होता है। तुम लोगों में जिसका जो-जो मत है, मैं उसे सुनना चाहता हूँ।”
व्यास उवाच