Bhīṣma’s Counsel on Reconciliation and Partition (भीष्मोपदेशः—संधि-राज्यविभागविचारः)
कथमेका बहूनां स्याद् धर्मपत्नी न संकर: । एतन्मे भगवान् सर्व प्रत्रवीतु यथातथम्,राजन! तदनन्तर दो घड़ीके बाद राजा ट्रुपदने मीठी वाणी बोलकर महात्मा व्यासजीसे द्रौपदीके विषयमें पूछा--“भगवन्! एक ही स्त्री बहुत-से पुरुषोंकी धर्मपत्नी कैसे हो सकती है? जिससे संकरताका दोष न लगे, यह सब आप ठीक-ठीक बतावें”
katham ekā bahūnāṃ syād dharmapatnī na saṅkaraḥ | etan me bhagavān sarvaṃ prabravītu yathātatham, rājan |
“एक ही स्त्री अनेक पुरुषों की धर्मपत्नी कैसे हो सकती है और संकर का दोष कैसे न लगे? भगवन्, यह सब मुझे यथार्थ रूप से बताइए।”
वैशम्पायन उवाच