Ādi-parva Adhyāya 132 — Duryodhana’s Instructions to Purocana at Vāraṇāvata
Lākṣāgṛha Planning
स ताज्थशिष्यान् महेष्वास: प्रतिजग्राह कौरवान् | पाण्डवान् धार्तराष्ट्रांश् द्रोणो मुदितमानस:,महाधनुर्धर आचार्य द्रोणने प्रसन्नचित्त होकर उन धुृतराष्ट्र-पुत्रों तथा पाण्डवोंको शिष्यरूपमें ग्रहण किया
sa tān śiṣyān maheṣvāsaḥ pratijagrāha kauravān | pāṇḍavān dhārtarāṣṭrāṃś ca droṇo mudita-mānasaḥ ||
वैशम्पायन बोले—महाधनुर्धर द्रोणाचार्य ने प्रसन्नचित्त होकर उन धृतराष्ट्र-पुत्र कौरवों तथा पाण्डवों को शिष्य-रूप में स्वीकार किया।
वैशम्पायन उवाच