पाण्डोः तपः-प्रसङ्गः, ऋण-धर्मः, अपत्य-प्राप्ति-चिन्ता
Pāṇḍu’s Asceticism, the Doctrine of Debts, and Deliberations on Progeny
तस्यै स प्रददौ मन्त्रमापद्धर्मान्ववेक्षया । अभिचाराभिसंयुक्तमब्रवीच्चैव तां मुनि:,दुर्वासाजीने पृथापर आनेवाले भावी संकटका विचार करके उनके धर्मकी रक्षाके लिये उसे एक वशीकरणमन्त्र दिया और उसके प्रयोगकी विधि भी बता दी। तत्पश्चात् वे मुनि उससे बोले--
tasyaī sa pradadau mantram āpaddharmān avavekṣayā | abhicārābhisaṃyuktam abravīc caiva tāṃ muniḥ ||
वैशम्पायन बोले—आपद्धर्म का विचार करके उस मुनि ने पृथा को एक मन्त्र दिया, जो वशीकरण-प्रयोग से सम्बद्ध था, और उसके प्रयोग की विधि भी बताई। इसके बाद मुनि ने उससे आगे कहा।
वैशम्पायन उवाच