Indra’s Query on Karma-vipāka and the Viśvarūpa Episode
Lalitopākhyāna Context
नत्वा स्तुत्वा चतुर्वक्रस्तद्वृत्तान्तं व्यजिज्ञपत् / विचिन्त्य सो ऽपि बहुधा कृपया लोकनायकः
natvā stutvā caturvakrastadvṛttāntaṃ vyajijñapat / vicintya so 'pi bahudhā kṛpayā lokanāyakaḥ
चार मुखों वाले ब्रह्मा ने प्रणाम कर स्तुति की और वह वृत्तांत निवेदित किया। लोकनायक नारायण ने भी करुणा से अनेक प्रकार से विचार किया।