अगम्यागमन-निष्कृति-निर्णयः
Expiations for Forbidden Sexual Relations
भक्तिश्रद्धासमायुक्तः स्नात्वान्तर्जलसंस्थितः / अष्टोत्तरसहस्रं तु जपेत्पञ्चदशाक्षरीम्
bhaktiśraddhāsamāyuktaḥ snātvāntarjalasaṃsthitaḥ / aṣṭottarasahasraṃ tu japetpañcadaśākṣarīm
भक्ति और श्रद्धा से युक्त होकर स्नान करके जल के भीतर स्थित हो, और पंद्रह अक्षरों वाले मंत्र का एक हज़ार आठ बार जप करे।