अगम्यागमन-निष्कृति-निर्णयः
Expiations for Forbidden Sexual Relations
पञ्चापञ्चात्मतृप्त्यर्थं मथनं क्रियतेतराम् / एवं मन्त्रानुभावात्स्यान्मथनं क्रियते यदि
pañcāpañcātmatṛptyarthaṃ mathanaṃ kriyatetarām / evaṃ mantrānubhāvātsyānmathanaṃ kriyate yadi
पाँच और अपाँच (पंचापंच) तत्त्वों की तृप्ति के लिए मंथन अत्यन्त किया जाता है। इसी प्रकार, यदि मंत्र-प्रभाव से मंथन किया जाए तो वैसा ही फल होता है।