Steya-doṣa-nirūpaṇa (On the Nature and Gravity of Theft) — within the Hayagrīva–Agastya Saṃvāda frame
तन्निवेदितमश्नन्तस्तदनन्यास्तदात्मकाः / तासां प्रवाहा गच्छन्ति निर्लेपास्ते परां गतिम्
tanniveditamaśnantastadananyāstadātmakāḥ / tāsāṃ pravāhā gacchanti nirlepāste parāṃ gatim
जो उन्हीं को अर्पित अन्न को खाते हैं, जो उन्हीं में अनन्य और तदात्म हैं—वे उनकी धारा में प्रविष्ट होते हैं; निर्लेप होकर परम गति को प्राप्त करते हैं।