Steya-doṣa-nirūpaṇa (On the Nature and Gravity of Theft) — within the Hayagrīva–Agastya Saṃvāda frame
बृहस्पतिरुवाच पैष्टिकं तालजं कैरं माधूकं गुडसंभवम् / क्रमान्न्यूनतरं पापं तदर्द्धार्द्धार्द्धतस्तथा
bṛhaspatiruvāca paiṣṭikaṃ tālajaṃ kairaṃ mādhūkaṃ guḍasaṃbhavam / kramānnyūnataraṃ pāpaṃ tadarddhārddhārddhatastathā
बृहस्पति ने कहा—पिष्ट से बना, ताड़ से उत्पन्न, कैर-निर्मित, मधूक-निर्मित और गुड़ से उत्पन्न—इन आसवों में क्रमशः पाप कम होता जाता है; और वह आधा-आधा-आधा होकर घटता है।