Steya-doṣa-nirūpaṇa (On the Nature and Gravity of Theft) — within the Hayagrīva–Agastya Saṃvāda frame
बृहस्पतिरुवाच पुण्यस्यार्द्धफलं प्राप्य द्विजवर्मा महायशाः / वज्रः प्राप्य तदर्धं तु तदर्धेन युताः परे
bṛhaspatiruvāca puṇyasyārddhaphalaṃ prāpya dvijavarmā mahāyaśāḥ / vajraḥ prāpya tadardhaṃ tu tadardhena yutāḥ pare
बृहस्पति ने कहा—महायशस्वी द्विजवर्मा ने पुण्य का आधा फल पाया; वज्र ने उसका आधा पाया; और अन्य लोग उससे भी आधे के भागी हुए।