Steya-doṣa-nirūpaṇa (On the Nature and Gravity of Theft) — within the Hayagrīva–Agastya Saṃvāda frame
तथापि बहुभाग्यानां पुण्यानामपि पात्रिणे / दृष्टपूर्वं तु तद्वाक्यं न कदाचिद्वृथा भवेत्
tathāpi bahubhāgyānāṃ puṇyānāmapi pātriṇe / dṛṣṭapūrvaṃ tu tadvākyaṃ na kadācidvṛthā bhavet
फिर भी, बहुत भाग्यशाली और पुण्यवान पात्र के लिए वह वचन, जो पहले सत्य सिद्ध हुआ है, कभी व्यर्थ नहीं होता।