Steya-doṣa-nirūpaṇa (On the Nature and Gravity of Theft) — within the Hayagrīva–Agastya Saṃvāda frame
पुरा काञ्चीपुरे जातो वज्राख्यो नाम चोरकः / तस्मिन्पुरवरे रम्ये सर्वैश्वर्यसमन्विताः / सर्वे नीरोगिणो दान्ताः सुखिनो दययाञ्चिताः
purā kāñcīpure jāto vajrākhyo nāma corakaḥ / tasminpuravare ramye sarvaiśvaryasamanvitāḥ / sarve nīrogiṇo dāntāḥ sukhino dayayāñcitāḥ
प्राचीन काल में कांचीपुर में वज्र नाम का एक चोर जन्मा। उस रमणीय नगर में सब लोग समस्त ऐश्वर्य से युक्त थे; सभी निरोग, संयमी, सुखी और दया से परिपूर्ण थे।