नाभौ स्वाधिष्ठिते मूले भ्रूमध्ये मूर्धनि क्रमात् / पद्मेन्दुकर्णिकामध्ये वर्णशक्तीर्दलेष्वथ
nābhau svādhiṣṭhite mūle bhrūmadhye mūrdhani kramāt / padmendukarṇikāmadhye varṇaśaktīrdaleṣvatha
नाभि में, स्वाधिष्ठान में, मूलाधार में, भ्रूमध्य में और मस्तक में क्रम से न्यास करे; फिर कमल-चन्द्र की कर्णिका के मध्य तथा उसके दलों में वर्ण-शक्तियों को स्थापित करे।