ललितोपाख्याने जप-न्यास-योगप्रकरणम्
Lalitopākhyāna: Procedure of Japa, Nyāsa, and Yogic Installation
व्यक्तैः कारमसूक्ष्मस्थूलशरीराणि कल्पयेत् / नाभौ हृदि भ्रुवोर्मध्ये बालाबीजान्यथ न्यसेत्
vyaktaiḥ kāramasūkṣmasthūlaśarīrāṇi kalpayet / nābhau hṛdi bhruvormadhye bālābījānyatha nyaset
स्पष्ट ‘कार’ वर्णों द्वारा सूक्ष्म और स्थूल शरीरों की कल्पना करे। फिर नाभि, हृदय और भौंहों के मध्य में बाल-बीजों का न्यास करे।