ललितोपाख्याने जप-न्यास-योगप्रकरणम्
Lalitopākhyāna: Procedure of Japa, Nyāsa, and Yogic Installation
चक्रेशीं न्यस्य चक्रं च समर्प्य व्याप्य वर्ष्मणि / शक्तिदेवीर्न्यसेत्सर्वसंक्षोभिण्यादिका अथ
cakreśīṃ nyasya cakraṃ ca samarpya vyāpya varṣmaṇi / śaktidevīrnyasetsarvasaṃkṣobhiṇyādikā atha
चक्रेशी का न्यास करके चक्र अर्पित करे और देह में व्याप्त करे; फिर सर्वसंक्षोभिणी आदि समस्त शक्तिदेवियों का न्यास करे।