ललितोपाख्याने जप-न्यास-योगप्रकरणम्
Lalitopākhyāna: Procedure of Japa, Nyāsa, and Yogic Installation
श्रद्धाकर्षणरूपा च ह्यात्माकर्षणरूपिणी / अमृताकर्षिणी प्रोक्ता शरीराकर्षणी तथा
śraddhākarṣaṇarūpā ca hyātmākarṣaṇarūpiṇī / amṛtākarṣiṇī proktā śarīrākarṣaṇī tathā
वह श्रद्धा को आकर्षित करने वाली तथा आत्मा को खींचने वाली कही गई है। उसे अमृत को आकर्षित करने वाली और शरीर को आकृष्ट करने वाली भी कहा गया है।