Dīkṣā-bhedaḥ (Types of Initiation) — Lalitopākhyāna: Hayagrīva–Agastya Dialogue
अद्वैतं भाव येन्नित्यं नाद्वैतं गुरुणा सह / न निन्देदन्यसमयान्वेदशास्त्रागमादिकान्
advaitaṃ bhāva yennityaṃ nādvaitaṃ guruṇā saha / na nindedanyasamayānvedaśāstrāgamādikān
नित्य अद्वैत-भाव का चिंतन करे, पर गुरु के साथ अद्वैत का दुराग्रह न करे; और वेद, शास्त्र, आगम आदि अन्य मत-मार्गों की निन्दा न करे।